गिलोय और नीम गिलोय में क्या फर्क है?HealthPlanet

Posted on Thu 15th Dec 2022 : 12:28

डायबिटीज का काल है नीम और गिलोय का ये रस, पीने से ब्लड शुगर लेवल हो जाता है कंट्रोल

डायबिटीज के मरीज को नियमित रूप से नीम-गिलोय का रस पीना चाहिए। इससे न केवल ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में रहता है, बल्कि दिल और सांस से जुड़ी बीमारी के लिए भी अच्छा है।
 
कोरोना महामारी में व्यक्ति संक्रमण से बचने के हर मुमकिन उपाय कर रहा है। मुश्किल उन लोगों को आ रही है, जो गंभीर बीमारियों से पहले से ग्रसित हैं। जैसे डायबिटीज। डायबिटीज के मरीज के लिए कोरोना से जुड़ी कोई भी दवा या घरेलू नुस्खा खतरा पैदा कर सकता है। लेकिन इम्यूनिटी को बहेतर बनाना और स्वास्थ्य को ठीक रखना भी जरूरी है। ऐसे में नीम और गिलोय का जूस उनके लिए रामबाण इलाज है।

डायबिटीज एक लाइफस्टाइल डिजीज है, जिसने कई लोगों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। WHO के अनुमान के अनुसार, दुनियाभर में हर साल 1.6 मिलियन मौतें मधुमेह से होती हैं। संगठन ने यह भी दावा किया है कि वर्ष 2030 तक डायबिटीज विश्वभर में सबसे बड़ी मौतों की सांतवी सबसे बड़ी वजह होगी। एक संतुलित आहार और जीवनशैली अपनाकर ब्लड शुगर लेवल को आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है।

​इंसुलिन का काम करेगा नीम की पत्ती का पाउडर
एथनो-मेडिसिन ( Ethno-Medicine) पर जर्नल स्टडीज के अनुसार, नीम का पाउडर इंसुलिन न लेने वाले मरीज के डायबिटीज लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए फायदेमंद साबित हुआ है।

मतलब ये है कि डायबिटीज के मरीज इंसुलिन की जगह नीम की पत्ती के पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं। विशेषज्ञों की मानें, तो कोई भी नीम के पत्तों को आसानी से चबा सकता है। लेकिन इसे खाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें, क्योंकि अधिक मात्रा में इसे खाने से हाइपोग्लाइकेमिक प्रभाव हो सकता है।

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नीम-गिलोय का जूस नेचुरल इम्यूनिटी बूस्टर-

विशेषज्ञों की मानें तो मधुमेह के मरीजों को नीम और गिलोय के जूस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। यह एक नेचुरल इम्यूनिटी बूस्टर है। इसे लेने के बाद आपको अन्य किसी इम्यूनिटी ड्रिंक की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह रस कमजोर लीवर और सांस की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए भी अच्छा है।

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने की वजह से शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में यह बहुत मदद करता है। जहां नीम में लीवर से जुड़ी समस्या को ठीक करने के गुण हैं, वहीं गिलोय का उपयोग लीवर डिसीज, मूत्र पथ संक्रमण और दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए किया जाता है।

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​संक्रमण से बचा सकता है नीम-

नीम एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जो डायबिटीज सहित कई स्वस्थ स्थितियों को ठीक करने के लिए जानी जाती है। नीम के पत्तों में मौजूद ट्राइटरपेनॉइड, एंटी वायरल यौगिकों, फ्लेवेनॉइड्स और ग्लाइकोसाइड्स ब्लड शुगर को कम करने में मदद करते हैं। इसके सेवन से आपका ग्लूकोज लेवल भी नियंत्रण में रहता है और मरीज वायरस के संक्रमण से भी बचा रह सकता है।
​गिलोय ब्लड शुगर लेवल करे कंट्रोल-

कोरोना महामारी के बाद से अधिकांश सभी गिलोय जैसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी के गुणों से परीचित हैं। इसे "अमरता की जड़" के नाम से भी जाना जाता है। फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टर मनोज. के. आहूजा कहते हैं कि गिलोय का रस पीने से हाई ब्लड शुगर लेवल सही बना रहता है।
नीम-गिलोय का जूस बनाने की विधि


10-15- नीम के पत्ते
1 बड़ा चम्मच- सूख गिलोय पाउडर
आधा इंच - अदरक कद्दूकस किया हुआ
10- पुदीने के पत्ते
2 चम्मच- नमक
1 चम्मच- काली मिर्च

जूस बनाने का तरीका-

सबसे पहले नीम को धोकर उबाल लें।
इसके बाद सभी सामग्री के साथ नीम और गिलोय पाउडर को ब्लेंडर में ब्लेंड कर लें।
तब तक ब्लेंड करें, जब तक की यह स्मूद न हो जाए। अब आप इस मिश्रण को छान लें और पी जाएं। ज्यादा मात्रा में बनाते हैं, तो कम से कम एक महीने तक एक बोतल में आप इसे फ्रिज में स्टोर करके रख सकते हैं।

डायबिटीज को प्रबंधित करना इतना आसान नहीं है, लेकिन नीम-गिलोय जूस जैसे स्वस्थ घरेलू नुस्खों से ब्लड शुगर स्पाइक्स को रोका जा सकता है। भले ही यह जड़ी-बूटी कई गुणों से भरपूर हैं, लेकिन किसी भी डायबिटीज मरीज को इसे अपने आहार में शामिल करने से पहले डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए।

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